Shorts Videos WebStories search

—Advertisement—

MP के इस शिवमंदिर में सुनाई देती है ॐ की ध्वनि शिवलिंग पर हल्दी का लेप करने से हो जाती है जल्दी शादी

Author Picture
Editor
Jul 16, 2023 3:38 PM IST

[inb_subtitle]

—Advertisement—

देश-दुनिया में भगवान शिव के अनेक मंदिर और शिवालय हैं, लेकिन उनमें से मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (होशंगाबाद) में नर्मदा सेठानीघाट पर भोलेनाथ का एक प्राचीन और अद्भुत मंदिर-शिवालय है, जो श्रीकाले  महादेव के नाम से जाना जाता है। धाम प्रसिद्ध है. गर्भगृह में स्थापित विशाल शिव लिंग के पास प्राचीन काल से आज भी ओम की ध्वनि सुनाई देती है और डमरू की ध्वनि भी शिव भक्तों के कानों में गूंजती है।

यह भी पढ़ें :  Sawan 2023: सावन सोमवार व्रत के दौरान इन 7 नियमों का पालन करें, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल

यह भी माना जाता है कि जिन युवक-युवतियों की लंबे समय से शादी नहीं हुई है, वे अगर श्रीकाले महादेव शिवलिंग पर हल्दी का लेप लगाएं तो उनके विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और उनकी शादी जल्द ही हो जाती है। इसके कई उदाहरण भी सामने आए हैं. अब इस मंदिर को उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसा ही आकार और स्वरूप दिया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : Ayurveda Tips: सावन में व्रत रखकर बचेंगे इन बीमारियों से पढ़िए व्रत रखने के अद्भुद लाभ

बंसीवाले बाबा ने की है यहाँ सेवा

सेठानीघाट के बाजू के गोलघाट पर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्रीकाले महादेव मंदिर में शुरुआती दौर में वंशीवाले बाबा एवं पतई वाले महाराज सहित अन्य संतों ने यहां आकर बाबा की नियमित सेवा की है।

यह भी पढ़ें : Sawan Somwar 2023: सावन में बाल नही कटवाने चाहिए क्या है बड़ा राज ?

2013 में माँ नर्मदा  बहा ले गई थी टीनेशेड

श्रीकाले महादेव मंदिर का इतिहास और महत्व बहुत पुराना है। पहले यह मंदिर बहुत ही छोटे रूप में 20 बाई 20 आकार का था। 2013 से पहले मंदिर में पक्की छत, छतरी और कलश नहीं था। बाबा के शिवलिंग की पूजा की जाती थी, लेकिन 2013 में नर्मदा में आई भीषण बाढ़ में मंदिर डूब गया और मां नर्मदा को यह विकराल रूप वाला टिनशेड पसंद नहीं आया और वह इसे अपने साथ बाढ़ के पानी में ले गईं।

यह भी पढ़ें :Vande Bharat Train : उज्जैन को मिल सकती है भगवा रंग में रंगी वंदे भारत ट्रेन जानिए क्या होता रूट

बाढ़ के बाद शुरू हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य

मंदिर से जुड़े सेवकों का कहना है कि 2013 की बाढ़ के बाद महादेव मंदिर धाम के जीर्णोद्धार और जीर्णोद्धार का काम कल से शुरू हुआ, जो अब भी जारी है. पुनर्निर्माण जिसमें शिवालय के शिखर की ऊंचाई गर्भगृह के फर्श से 45 फीट नीचे और नर्मदा तट से 165 फीट नीचे है। जीर्णोद्धार के तहत नींव में हाथी के पैरों से बने खंभे लगाए गए हैं। जिससे भविष्य में किसी भी बाढ़ में मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

यह भी पढ़ें : बरसात के सीजन में इन 5 सब्जियों से बनाकर रखे दूरी नही तो देंगी सड़ा आतें

इस मंदिर में भी महाकाल की तरह दिखेगा ऊपर से श्रीयंत्र

काले महादेव मंदिर धाम को भी उज्जैन महाकाल ज्योतिर्लिंग की तरह विकसित किया जा रहा है। इसमें बने शिखर कलश को महाकाल की तर्ज पर बनाया जा रहा है. इसके ऊपर स्वर्ण कलश होगा. यदि इसे ड्रोन या हेलीकॉप्टर से देखा जाए तो यह महाकाल या श्रीयंत्र जैसा दिखाई देगा।

यह भी पढ़ें : Sawan 2023: सावन में महिलाएं हरी चूड़ी पहनना क्यों करती है पसंद

Verified Source Google News www.khabarilal.net ✓ Trusted
Editor

संजय विश्वकर्मा खबरीलाल न्यूज़ पोर्टल हिंदी में कंटेंट राइटर हैं। वे स्टॉक मार्केट,टेलीकॉम, बैंकिंग,इन्सुरेंस, पर्सनल फाइनेंस,सहित वाइल्ड लाइफ से जुड़ी खबरें लिखते हैं।संजय को डिजिटल जर्नलिज्म में 8 वर्ष का अनुभव है।आप संजय से 09425184353 पर सम्पर्क कर सकते हैं।… और पढ़ें

लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज

Leave a Comment

होम
MP ब्रेकिंग
powerफटाफट
Join करें
वेब स्टोरीज