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एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ उमरिया ने सौंपा ज्ञापन 

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Feb 24, 2025 11:13 PM IST

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एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने सौंपा ज्ञापन
— एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने सौंपा ज्ञापन

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जिला मुख्यालय उमरिया में आज जिला अधिवक्ता संघ उमरिया अध्यक्ष पुष्पराज सिंह के नेतृत्व में जिले भर के अधिवक्ताओं ने आज 24 फरवरी दिन सोमवार की दोपहर 2:00 बजे जिला सत्र न्यायाधीश को महामहिम, राष्ट्रपति महोदय राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली के नाम एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विषय को लेकर के ज्ञापन सौपा है.ज्ञापन के माध्यम से जिला अधिवक्ता संघ ने अपील की है कि भारत सरकार के द्वारा एडवोकेट संशोधन बिल 2025 को वापस लिया जाए.

क्या लिखा गया है ज्ञापन में 

हम समस्त अधिवक्तागण जिला अधिवक्ता संघ उमरिया के हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपकर विनय करते है कि भारत सरकार के द्वारा एडवोकेट एक्ट 1961 में संशोधन कर अधिवक्ताओं के विरोध में एडवोकेट संशोधन बिल 2025 प्रस्तावित किया गया है जो कि अधिवक्ताओं के अधिकार एवं कार्यों को प्रभावित करेगा। हम समस्त अधिवक्तागण आपसे सादर आग्रह करते है कि एडवोकेट एक्ट 1961 को पूर्व की भांति रखा जाये एवं उक्त अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन धारा 4, 9, 35ए, 26ए, 24ए और 24बी, 49ए (1), एवं 49ए, में प्रस्तावित संशोधन नहीं किया जावे उक्त संशोधन से अधिवक्तओं के हितों में सीधा प्रभाव पडेगा, वकालत का कार्य प्रभावित होगा। वहीं अधिवक्ता डरे सहमे होकर निष्पक्ष वकालत कार्य नहीं कर पायेगे जो कि संविधान की मंशा के विपरीत होगा।

हम समस्त अधिवक्तगण जिला अधिवक्ता संघ उमरिया ज्ञापन प्रस्तुत कर सादर आग्रह करते है कि निष्पक्ष वकालत कार्य के लिए वकीलों के हितों को प्रभावित करने वाला अधिवक्ता संशोधन बिल 2025 प्रस्ताव को लागू न कर सरकार प्रस्ताव वापस ले। उपरोक्त ज्ञापन विनम्रतः सादर प्रस्तुत है।

एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ उमरिया ने सौंपा ज्ञापन 
एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने सौंपा ज्ञापन

 

हालाकिं कानून मंत्रालय ने देशभर में वकीलों के विरोध के बाद वकालत (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा वापस ले लिया है। यह विधेयक अदालतों के कामकाज में बाधा डालने वाले वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव करता था। साथ ही इसमें इसमें वकीलों के लाइसेंस रद्द करने का भी प्रावधान किया गया था। देशभर में कई अधिवक्ता संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया था।

गौरतलब है कि ड्राफ्ट बिल 13 फरवरी को मंत्रालय की वेबसाइट पर जन परामर्श के लिए उपलब्ध कराया गया था। मंत्रालय ने विरोध को देखते हुए आगे कहा, ‘हालांकि, प्राप्त सुझावों और चिंताओं को देखते हुए, अब परामर्श प्रक्रिया को खत्म करने का फैसला लिया गया है। लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर, संशोधित ड्राफ्ट बिल हितधारकों के साथ परामर्श के लिए नए सिरे से तैयार किया जाएगा।’

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