2 बाघों की मौत का मामला शहडोल साउथ के वन परिक्षेत्र जयसिंहनगर के करपा बीट से आया है जहां दो बाघ की मौत हो गई है।
बताया जा रहा है कि एक बाघ की मौत करंट से हुई है।वही बताया जा रहा है दूसरा बाघ जो कि हाल ही में टाईगर फाइट में वन मंडल उत्तर शहडोल की जयसिंह नगर रेंज की वनचाचर बीट के कक्ष क्रमांक 380 RF मे दो बाघ के आपसी संघर्ष में घायल हुए थे। जिसमें से एक बाघ को बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व के मगधी कोर ज़ोन में बने इनक्लोजर में रखा गया है।वही इस दूसरे बाघ की मौत संक्रमण फैलने से हुई है।
इस लैंडस्केप में हाल ही में जनवरी माह में 4 बाघों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में हुई थी।
हाल ही में पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने उमरिया जिले और आसपास के क्षेत्र के लिए एक अलर्ट जारी किया था जिसमें बताया गया था कि सामान्य वन मंडल में जो टाइगर विचरण कर रहे हैं उन पर शिकारियों की नजर है। लेकिन पीसीसी का वाइल्डलाइफ के अलर्ट को शहडोल संभाग में नजर अंदाज कर दिया गया यही कारण है कि इस लैंडस्केप में इस नए वर्ष में कुल 6 बाघों की मौत हो चुकी है।
दरअसल जयसिंहनगर का यह क्षेत्र टाईगर कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है।बांधवगढ़ के बाघ संजय दुबरी टाईगर रिज़र्व आने जाने के लिए उपयोग में करते है।लेकिन वर्तमान में दिन ब दिन जंगलों में बढ़ रहे अतिक्रमण से यह कॉरिडोर अस्त्तिव खोता चला जा रहा है।
सूत्र बता रहे है कि बाघों की मौत बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व के मानपुर बफर के सीमावर्ती क्षेत्र में ही हुई है।
करंट का क्या है ईलाज
अक्सर जंगलों के आसपास के गांव में अपनी खेती को बचाने के लिए किसान झटका करंट के नाम पर हैवी करंट अपने बाड़े में प्रवाहित कर देते हैं जिसमें छोटे-छोटे वन्यजीवों से लेकर के टाइगर तक फस जाते हैं हाल ही में उमरिया जिले में एक रिटायर्ड टीआई के घर के बाड़े में ऐसे ही एक बाघ की मौत जनवरी माह में हुई है। वही जंगलों के अंदर वाइल्ड बोर जैसे छोटे छोटे वन्यजीव के शिकार के लिए लगाए गए करंट में बाघ चपेट में आ जाते है।यदि गस्त के नाम पर चलने वाले फर्जीवाड़े पर बड़े अधिकारी सख्त हो जाए तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति शायद कम हो जाए।








