उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ टाईगर रिज़र्व वैसे तो पूरे विश्व भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता ही है,इसके साथ ही बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व में अब ऐसे लोगो की कुदृष्टि भी पड़ गई है,जो बांधवगढ़ के इको सिस्टम के लिए चुनौती भी बनते जा रहे है।
बांधवगढ़ में बढ़ती बाघों की संख्या वैसे भी प्रबंधन के लिए चुनौती बनी हुई है।बाघ गांवों की ओर रुख कर रहे है कई बाघ अब उमरिया जिले के सामान्य वन मंडल में डेरा डाल रहे है,प्रबंधन को अब इन चुनौतियों के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है वह है बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व क्षेत्र में रसूखदारों का अवैध अतिक्रमण। इन अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलन्द है कि बांधवगढ़ प्रबंधन के आदेश को हवा में ये यू ही उड़ा देते है।एक ऐसा ही अवैध अतिक्रमण इन दिनों बांधवगढ़ में बड़ी सुर्खियों में है।जिस मामले में बीटीआर के द्वारा 2 बार नोटिस जारी की जा चुकी है लेकिन मामले फ़ाइल पर राजस्व न्यायालय में धूल खा रही है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल पूरा मामला बांधवगढ टाईगर रिज़र्व के मानपुर बफर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नरवार हल्का पतौर का है। जहां ग्रीन हैरिटेज रिसोर्ट का निर्माण जहाँ बीते वर्ष से आर आर ब्रदर्स रियल स्टेट एन्ड प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा किया जा रहा है। यह निर्माण बांधवगढ़ प्रबंधन के अनुसार ईको सेंसिटिव जोन में हो रहा है।इस निर्माण को रोकने के लिए प्रबंधन के द्वारा 2-2 बार नोटिस जारी कर बिना सक्षम संस्थाओं की अनुमति के बिना वृहद स्तर पर संवेदनशील क्षेत्र में हो रहे कंस्ट्रक्शन कार्य को रोकने के निर्देश दिए जा चुके है,लेकिन अभी तक निर्माण रोकने के बजाय बड़ी जोर शोरो से किया जा रहा है।यहां तक खबर यह भी है कि उक्त फर्म के द्वारा राजस्व क्षेत्र के अलावा फॉरेस्ट क्षेत्र की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है।
बांधवगढ़ प्रबंधन ने क्यों माना अवैध निर्माण
दरअसल बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व ने आर आर ब्रदर्स रियल स्टेट एन्ड प्राइवेट लिमिटेड को जारी नोटिस में उल्लेख किया है कि ग्राम नरवार पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13 दिसंबर 2016 को अधिसूचित गजट नोटिफिकेशन में यह गाँव ईको सेंसिटिव जोन की सूची में क्रमांक 100 पर प्रदर्शित है।ऐसे में नोटिफिकेशन में साफ तौर पर सुलेख है ऐसे गाँव या क्षेत्र जो इको सेंसिटिव जोन की सूची में शामिल है वहां पारिस्थितिक अनुकूल पर्यटन क्रियाकलाप से संबंधित पर्यटकों के अस्थायी अधिभोग के लिए वास सुविधा के सिवाय संरक्षित क्षेत्र की सीमा से एक किलोमीटर तक या पारिस्थितिक संवेदी जोन के विस्तार तक इनमें जो भी निकट है, नये वाणिज्यिक होटल और रिसोर्ट के लिए परमिशन नही दिया जा सकता है। जबकि प्रधान वन संरक्षक भोपाल के द्वारा वर्ष 2017 में साफतौर पर आदेश जारी किए गए थे कि होटल ओर विश्राम स्थलो का वाणिज्यिक स्थापना एवं सन्निर्माण क्रियाकलाप, विनियमित क्रियाकलापों के अन्तर्गत आता है जिसके लिये नियमानुसार सम्बधित संस्थाओं से परमिशन लेना आवश्यक है।
तो बिना अनुमति कैसे खड़ा हो गया ग्रीन हैरिटेज
अब आप सोच रहे होंगे कि बिना सक्षम अनुमति के यह कैसे संभव है कि इतना बड़ा अवैध निर्माण बाँधवगढ़ टाईगर रिज़र्व के ईको सेंसटिव जोन में कैसे हो गया और निर्माण सतत जारी है।दरअसल इस तरह के अवैध निर्माणों के पीछे असल वजह है राजस्व और वन विकास के बीच सामंजस्य की कमी।इस मामले में जब हमने बीटीआर के सक्षम अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में जारी गजट नोटिफिकेशन में बांधवगढ क्षेत्र अंतर्गत जिन गांवों को शामिल किया गया है,उनमे से कई गाँव राजस्व क्षेत्र में आते है ऐसे में जब हम कोई नोटिस ऐसे अवैध निर्माण को लेकर जारी करते है तो इसकी जानकारी हम राजस्व विभाग को भी भेजते है,ऐसे तमाम अवैध निर्माणों पर राजस्व विभाग ही कार्यवाही कर सकता है।
इस मामले में जब आर आर ब्रदर्स रियल स्टेट एन्ड प्राइवेट लिमिटेड का पक्ष जानने के लिए बीटीआर द्वारा जारी नोटिस में दिए गए मोबाइल नम्बर पर संपर्क करने की कोशिस की गई तो संपर्क स्थापित नही हो पाया।
ग्रीन हैरिटेज रिसोर्ट (Green Heritage Resort) के मामले में जब वन परिक्षेत्र अधिकारी मानपुर बफर मुकेश अहिरवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उक्त रिसार्ट के निर्माण को लेकर अनूपपुर जिले के जैतहरी स्थित आर आर ब्रदर्स रियल स्टेट एन्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर को 2 बार नोटिस दिया जा चुका है लेकिन अभी तक उन्होंने कोई से सक्षम संस्थान की अनुमति कार्यालय को उपलब्ध नही करवाई है।
वही इस मामले में जब हमने अनुविभागीय अधिकारी मानपुर राजस्व हरनीत कौर कलसी से बात की गई तो उन्होंने कहा तत्कालीन एसडीओ फॉरेस्ट के द्वारा मुझे उक्त मामले में अवगत करवाया था।उस दौरान हमने भी एक नोटिस जारी थी।मुझे नोटिस की तारीख तो अभी याद नही है लेकिन हमने नायाब तहसीलदार को निर्देशित किया था कि राजस्व क्षेत्र में मौजूद ईको सेंसटिव जोन में साफ तौर पर कड़ी नजर रखी जाए।मैं ग्रीन हैरिटेज मामले में नायाब तहसीलदार और पटवारी को मौके पर भेजकर वस्तुस्थिति का जायजा लेती हूं।अगर निर्माण जारी है या किया जा चुका है तो कार्यालय से दोबारा पत्र जारी किया जाएगा।
तो क्या नही है विभागीय सामंजस्य
बांधवगढ टाइगर रिज़र्व में बढ़ती बाघों की संख्या जो जिले के लिए गौरव का विषय तो है लेकिन इससे बाघ-मानव द्वंद भी बढ़ते ही जा रहे है।इस द्वंद के लिए ये तमाम अवैध निर्माण भी जिम्मेदार है,जंगल मे हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने के लिए अगर वन और राजस्व के बीच सामंजस्य नही बना तो आने वाले समय मे कॉन्फ्लिक्ट बढ़ते ही चले जाएंगे जरूरत है समय रहते ऐसे तमाम अवैध अतिक्रमण को ढहाने की जिसके लिए कड़ी कार्यवाही की जरुरत है नाकि पत्र जारी कर जिम्मेदारी से किनारा करने की।
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