IMD ALERT : जनवरी में अक्सर ठंड का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है लेकिन उमरिया जिले में इन दोनों ठंड बढ़ती ही चली जा रही है। दोपहर में चुभन भारी धूप होने के बावजूद भी सुबह शाम ठंड बढ़ जा रही है। मौसम केंद्र भोपाल के द्वारा अगले 24 घंटे के लिए मौसम का अलर्ट जारी किया गया है जिसमें बताया गया है, उमरिया जिला मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा शहर है।
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार शहडोल का कल्याणपुर 3.0 डिग्री सेल्सियस के साथ में मध्य प्रदेश का सबसे ठंडा शहर है। वही 4.8 डिग्री सेल्सियस के साथ में उमरिया प्रदेश का सबसे दूसरे ठंडे शहर की लिस्ट में शामिल है। 5.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ में राजगढ़ और खजुराहो है वहीं 5.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ में सतना का चित्रकूट और पांच शब्द चार डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ में मंडला प्रदेश का पांचवा सबसे ठंडा शहर है।
जारी किया गया शीतलहर का यलो अलर्ट
मौसम केंद्र भोपाल के द्वारा अगले 24 घंटे के लिए अनूपपुर, शहडोल, उमरिया,कटनी और मैहर जिलों के लिए शीत लहर का येलो अलर्ट जारी किया गया।
कोहरे का यलो अलर्ट
वही ग्वालियर, दतिया,भिंड, रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों के लिए मध्यम कोहरे का येलो अलर्ट मौसम केंद्र के द्वारा जारी किया गया है।
क्यों बदली अचानक मौसमी परिस्थितियां
- एक पश्चिमी विक्षोभ, जो अफगानिस्तान एवं निकटवर्ती पाकिस्तान के क्षेत्रों पर माध्य समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊंचाई पर एक ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण के रूप में, मध्य एवं ऊपरी क्षोभमंडलीय पश्चिमी पवनों के मध्य में एक ट्रफ़ के रूप में माध्य समुद्र तल से 5.8 किमी की ऊंचाई लगभग 25° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में 60° पूर्वी देशांतर में अवस्थित है।
- दक्षिण-पश्चिम राजस्थान एवं निकटवर्ती दक्षिण पाकिस्तान के ऊपर माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई पर एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण स्थित है।
- उत्तर-पूर्व भारत के ऊपर माध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊँचाई पर, लगभग 269 किमी/घंटा गति से उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवाएँ बह रही है।
- दो पश्चिमी विक्षोभ क्रमिक रूप से 19 जनवरी 2026 की रात्रि तथा 21 जनवरी 2026 की रात्रि से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना है।
सुझाये गए कार्य
- कोहरा, विशेषकर देर रात और सुबह के समय, दृश्यता को काफी कम कर सकता है। फॉग लैंप या तो बीग हेडलाइट का उपयोग करें हाई बीग लाइट का उपयोग न करें।
- कम दृश्यता के कारण सड़क, रेल एवं हवाई परिवहन प्रभावित हो सकता है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना उसी अनुसार बनाने की सलाह दी जाती है।
- कोहरे में मौजूद कण पदार्थ तथा विभिन्न प्रकार के प्रदूषकों के संपर्क में आने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है तथा खाँसी एवं साँस लेने में कठिनाई बढ़ सकती है, इसलिए नियमित व्यायाम करें और मास्क का प्रयोग करें।
- शीत लहर के संपर्क में आने पर शीत से प्रभावित अंगों के लक्षणों जैसे कि संवेदनशून्यता, सफेद अथवा पीले पड़े हाथ एवं पैरों की उंगलियों कान की लो तथा नाक की ऊपरी सतह का ध्यान रखे।
- शीत लहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त एवं संवेदनशून्य तथा लाल फफोले पड़ सकते है। यह एक गंभीर स्थिति होती है जिसे गेंगरीन भी कहा जाता है। यह अपरिवर्तनीय होती है। अतः शीत लहर के पहले लक्षण पर ही चिकित्सक की सलाह लें तथा तब तक अंगों को गरम करने का प्रयास करें।
- शीत लहर के प्रभाव से हाइपोथर्मिया हो सकता है। शरीर में गर्मी के हास से कंपकपी, बोलने में दिक्कत, अनिद्रा, मांसपेशियों में अकडन, सांस लेने में दिक्कत/निश्वेतन की अवस्था हो सकती है। यह अत्यधिक गंभीर अवस्था
- है इसमें तत्काल चिकित्सीय सहायता ले।
- शरीर की गर्माहट बनाये रखने हेतु अपने सर, गर्दन, हाथ और पैर की उँगलियों को अच्छे से ढके एवं पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े जैसे- दस्ताने, टोपी, मफलर, एवं जल रोधी जूते आदि पहने। शीत लहर के समय जितना संभव हो सके घर के अंदर ही रहें और कोशिश करें कि अतिआवश्यक हो तो ही बाहर यात्रा करें।
- इस समय विभिन्न प्रकार की बीमारियों की संभावना अधिक बढ़ जाती है, जैसे फ्लू, सर्दी खांसी एवं जुकाम आदि के लक्षण हो जाने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
- पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें एवं शरीर की प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं एवं नियमित रूप से गर्म पेय पदार्थ का अवश्य सेवन करें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ओर स्थानीय अधिकारियों जैसे आधिकारिक स्रोतों से मीसम के पूर्वानुमान और अलर्ट पर नजर रखें।
कृषकों के लिए विशेष सलाह
- लंबे समय तक बने रहने वाले कोहरे के कारण फसलों में अत्यधिक नमी और संभावित रोगों से बचाव करें। पशु शालाओं में श्वसन संक्रमण से बचान हेतु उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।
- पशुओं को ठंडी हवा से बचाने के लिए बंद या आंशिक बंद गोठ में रखें। पशुओं को पीने के लिए गुनगुना पानी दें, ठंडा पानीन दें। पशुओं के लिए सूखी बिछावन जैसे पुआल या भूसा बिछाएँ।
- पशुओं को गुड, तेलखली, दाना आदि ऊर्जावान चारा दें। किसान खुद ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़े, टोपी, दस्ताने और जूते पहनें। अत्यधिक ठंड में खेत पर काम करने से बचें। रबी फसलों की बुवाई जल्दी पूरी करें तथा खेतों को सही ढंग से तैयार करें,
- ताकि उचित नमी बनी रहे। देर से बोई जाने वाली फसलों के लिए बीज दर बढ़ाएँ। मिट्टी की नमी की नियमित निगरानी करें। युवा फसतों और उभरते पौधों को आवश्यकता अनुसार सिंचाई दें तथा जल जगाव से बचाव करें।
- फसल की अवस्था और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। खेतों को निराई-गुड़ाई कर साफ रखें या अनुशंसित हर्बीसाइड का उपयोग करें।
- फसलों में कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें। आवश्यकता पड़ने पर फेरोमोन ट्रैप पक्षी बैठने के साधन या अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
- रबी चारे की फसलों की बुवाई करें। पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध कराएँ, स्वच्छ पानी दें और उन्हें ठंड से बचाएँ।
- बछड़ों को कीट-मुक्त करने की दवा दें तथा पशु शेड की नियमित सफाई बनाए रखें।








