छतरपुर। कुछ कहानियां सिर्फ़ अख़बारों की सुर्खियां नहीं होतीं, वे समाज के ज़मीर को झकझोरने वाली हकीकत होती हैं। प्रांजली अग्रवाल की कहानी भी ऐसी ही एक सच्चाई है, जो हर उस बेटी को डराने के लिए काफी है, जो अपने सपनों पर भरोसा करती हैं। कभी अपने घर की लाडली, मां-पिता की आंखों का तारा, आज दर-दर की ठोकरें खा रही है। क्योंकि उसने एक इंसान पर विश्वास कर लिया, उसने प्यार किया और उस प्यार को अपनी दुनिया मान लिया। लेकिन बदले में उसे जो मिला, वह सिर्फ धोखा, दर्द और समाज की बेरुखी थी।
इंस्टाग्राम से शुरू हुई दोस्ती, जिसने उजाड़ दी पूरी ज़िंदगी
दमोह जिले के हटा निवासी प्रभात कुमार अग्रवाल की बेटी प्रांजली की ज़िंदगी में छतरपुर के प्रॉपर्टी कारोबारी कैलाश अरजरिया के बेटे मनु अरजरिया की एंट्री इंस्टाग्राम के जरिए हुई। शुरुआत में यह सिर्फ एक दोस्ती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। प्रांजली ने मनु को अपनी दुनिया का हिस्सा बना लिया, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि मनु सिर्फ़ खेल खेल रहा था। वह धोखे के उस जाल में फंस चुकी थी, जहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
प्रेम पर भरोसा करके प्रांजली ने अपना घर छोड़ दिया और छतरपुर आ गई। उसके मन में अपने प्यार को लेकर कोई शक नहीं था। वह मनु के साथ ग्वालियर गई, जहां आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। उसने एक नये जीवन का सपना देखा था, जिसमें मनु उसका सच्चा हमसफर होगा। लेकिन यह सपना सिर्फ़ एक छलावा निकला।
मां बनने की खुशी, जिसे बेरहमी से छीन लिया गया
मनु ने शादी के बाद उसे किराए के एक मकान में रखा, सबकुछ ठीक चल रहा था। लेकिन जब प्रांजली गर्भवती हुई, तो मनु का रवैया पूरी तरह बदल गया। जिसने कल तक “तू मेरी जान है” कहा था, आज वही उससे पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाश रहा था। फिर वह दिन आया, जब मनु ने उसका जबरन गर्भपात करवा दिया। प्रांजली रोती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसे दर्द में तड़पता छोड़ दिया गया। जिसे वह अपनी दुनिया मान बैठी थी, उसी दुनिया ने उसे मरने के लिए बेसहारा छोड़ दिया।
न घर है, न सहारा—सिर्फ ताने, धमकियां और बेबसी
जब प्रांजली ने अपने माता-पिता से मदद की गुहार लगाई, तो जवाब मिला— “तूने अपनी मर्जी से घर छोड़ा था, अब वापस मत आना!” जब वह पुलिस के पास गई, तो वहां से भी कह दिया गया—”यह तुम्हारा निजी मामला है, पहले घरवालों से सुलझाओ!” अब प्रांजली के पास न घर है, न समाज का सहारा। ऊपर से