सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण छिंदवाड़ा जिले के सीमा के पास छातीआम सामान्य वन मंडल बीट में एक साढ़े चार वर्षीय नर बाघ का 24 दिन पुराना शव मिला है। चौंकाने वाली बात यह है कि टाइगर रिजर्व के अधिकारी इतने दिनों तक बाघ की सुध लेना ही भूल गए। यह बाघ वर्ष 2024 में बांधवगढ़ से लाया गया था और इसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बांधवगढ़ में ही रेडियो कॉलर लगाया गया था। 19 मार्च को जब WWF ने कॉलर आईडी हटाने (ड्रॉप करने) की अनुमति दी, तब STR प्रबंधन हरकत में आया। जब टीम लोकेशन पर पहुँची, तो पता चला कि बाघ की मौत 24 दिन पहले ही हो चुकी थी। साक्ष्य मिटाने के लिए शिकारियों ने रेडियो कॉलर को जलाकर नष्ट कर दिया था, ताकि सिग्नल न मिल सके।
जांच में सामने आया है कि बाघ को जहर देकर मारा गया था। घटना की भनक तब लगी जब सर्च टीम को मौके पर एक मृत बैल मिला। डॉग स्क्वाड की मदद से टीम मुख्य आरोपी उदेसिंग के खेत तक पहुँची, जहाँ बाघ का शव बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि आरोपी इस क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती भी करते हैं।STR की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी उदेसिंग सहित पांच लोगों (बिशनलाल, मनोहर, कैलाल और मानकसिंग) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस घटना ने रिजर्व की मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि कॉलर आईडी वाला बाघ 24 दिनों तक गायब रहा और प्रबंधन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल बहानेबाजी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
उक्त पूरे मामले को लेकर सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में एक रिहैबिलिटेटेड बाघ था जिसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वर्ष 2024 में लाया गया था। इस बात का शिकार मवेशी में यूरिया डालकर किया गया है।यह घटना वेस्ट छिंदवाड़ा डिविजन के सांगाखेड़ा रेंज के राजस्व वनक्षेत्र में हुई है। जैसी प्रबंधन को जानकारी लगी बाग का शव उक्त स्थल पर पड़ा हुआ है बाघ का शव बरामद करने के तुरंत ढाई घंटे के अंदर आरोपियों को पकड़ लिया गया था। आरोपियों का कहना है की घटना स्थल के आसपास में अफीम की खेती कर रहे थे और उनके द्वारा मवेशी में यूरिया डाल करके बाघ को मारा गया है। मौत के बाद उन्होंने मृत बाघ को वहीं गड़ा दिया था। वर्ष 2024 में जब बाघ को बांधवगढ़ चलाया गया था तो बांधवगढ़ में ही इस रेडियो कॉल लगाया गया था। प्रबंधन के द्वारा इंतजार किया जा रहा था कि यह बाघ अपनी टेरिटरी बना ले। हालांकि यह बाघ अपनी टेरिटरी बन चुका था और इस बाघ की कॉलर आईडी को हटाने के लिए हमने PCCF वाइल्डलाइफ भोपाल से परमिशन प्राप्त कर ली थी और इसीलिए बाघ की तलाश की जा रही थी।
24 दिन क्यों लगें तलाश में
सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने आगे बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अन्य बाघों की तरह ही इस बाघ की मॉनिटरिंग की जा रही थी और अभी ऑल इंडिया टाइगर ऐस्टीमेशन में भी इस बाघ की गणना हुई थी। बाघ की कॉलर आईडी हटाने का प्रोसेस जब चालू हुआ इसलिए बाघ की तलाश की जा रही थी लेकिन बाघ 24 दिनों तक नहीं मिला। बाघ की तलाश के दौरान पता चला कि बाघ की मौत हो गई है। आरोपियों के द्वारा दावा किया जा रहा है कि उन्होंने मवेशी में यूरिया डाल करके बाघ को मौत के घाट उतारा है हालांकि आरोपियों के द्वारा उक्त मवेशी का मुआवजा भी नहीं लिया गया है जिससे प्रतीत होता है कि घटना को छुपाने के लिए उन्होंने यह कृत्य किया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के असल कारणों का पता चल पाएगा।

