Tigress Dotty death news : विश्वप्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाईगर रिज़र्व की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर के बाद वन्यजीव प्रेमियों के बीच मायूसी की लहर है।लेकिन इनदिनों मानपुर बफर में बाघ के हमले और ऐसी अन्य घटनाओं की पुनरावृत्ति लगातार बढ़ती ही चली जा रही है क्योंकि मानपुर बफर के रेंज ऑफिसर को इनदिनों पर्यटन प्रभारी का प्रभार भी दिया गया है। कहीं न कही क्षेत्र में मॉनीटिरिंग और पेट्रोलिंग की कमी के कारण घटनाए बढ़ रही है।ऐसा क्यों कहा जा रहा है आगे खबर में आपको इसका साइलेंट जबाब जरुर मिल जाएगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल Bandhavgarh प्रबंधन ने बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मानपुर बफर रेंज के बीट मझखेता में हाथी से गश्ती के दौरान दोपहर बाद एक मादा बाघ का शव मिला है। एनटीसीए के मानको का पालन करने हुए घटनास्थल को डॉग स्क्वाड के द्वारा मृत बाघ की तथा आसपास के क्षेत्र की सघन जांच की गई. कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया।और सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी एवं विकास खंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शव विच्छेदन एवं शव परीक्षण की कार्यवाही की गई। कार्यवाही की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी करायी गयी. अग्रिम जांच हेतू आवश्यक नमूने संकलित कर विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे गए है। प्रथम दृष्टया प्रबंधन बाघिन की मौत का कारण संदिग्ध मान रहा है।
कौन है बाघिन डॉटी
दरअसल जिस बाघिन को आज बाँधवगढ़ ने खोया है वह उस बाघ की माँ है जिसने खितौली कोर जोन में अपनी बादशाहत कायम करके रखी हुई है।हम बात लर रहे है बाघ D1 की। बाघिन डॉटी का लाइफ हिस्ट्री काफी रोचक है।वर्ष 2011-12 में मगधी जोन में प्रसिद्ध पटिहा मादा एवं ब्लू आई नर की संतान के रूप में बाघिन डॉटी और बाघिन स्पॉटी का जन्म हुआ था।हिंदी फिल्म सीता और गीता की तरह बाघिन डॉटी और बाघिन स्पॉटी पूरे विश्व भर में प्रसिद्धि पा चुकी हैं।डॉटी मगधी तो स्पॉटी ताला कोर ज़ोन में अपनी टेरिटरी बनाई। डॉटी की पहली संतान के रूप में 3 बाघ शावको का जन्म हुआ।नाम मिला DE,DE और D3 जिसमे आज D1 बाँधवगढ़ के एक डोमिंनेट बाघ के रूप में जाना जाता है। बाघिन डॉटी जब दूसरी बार माँ बनी तो 4 फीमेल शावको ने जन्म लिया उन्हें नाम मिला त्रिशूली, सुंदरी और अन्य 2 इन्ही बाघिनों ने माँ डॉटी से मगधी कोर ज़ोन की टेरिटरी छीन ली। घटना 2022 के आसपास की है उसी दौरान ताला कोर जोन में बाघिन स्पॉटी की मौत हो गई।प्रबंधन ने कुछ और दावे किए थे लेकिन स्पॉटी की मौत का असल काऱण स्टार्वेशन बाँधवगढ़ के जानकारों के द्वारा बताया गया था।डॉटी ने अपनी बहन की टेरिटरी पर कब्जा कर लिया था।तबसे ताला कोर ज़ोन में दिखने वाली बाघिन ने मानपुर बफर तक अपना क्षेत्र बना कर रखा हुआ था।वैसे तो वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट बताते है कि बाघिन डॉटी कई बार माँ बनी लेकिन 3 बार की जानकारी आम है।
एक दिन पहले चरवाहे को बाघिन ने किया था घायल
विश्वत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 8 अक्टूबर की दोपहर घटनास्थल हरदीहा नाला के पास तिलहाई पटपर रामपुर में मझखेता निवासी चरण सिंह को बाघिन ने हमला कर दिया।बताया तो ये जा रहा है कि मौके पर जब बाघिन ने हमला किया था तब उसके साथ मौजूद कुछ चरवाहों ने लाठी डंडे से बाघिन को मारकर चरवाहों ने भगाया है।भैस चराने जंगल गए चरण सिंह ने जैसे ही प्यास लगने पर नाले का रुख किया वैसे ही बाघिन ने उनपर हमला कर दिया था।
तो क्या Bandhavgarh में स्पॉटी जैसे ही मिली डॉटी को मौत उठे ये बड़े सवाल
चरवाहे की नही ली गई कोई खबर
मीडिया से बातचीत के दौरान चरण सिंह ने बताया कि घटना के तुरंत बाद फ़ॉरेस्ट के कमर्चारियों ने मुझे मानपुर स्वास्थ्य केंद्र में 8 अक्टूबर को छोड़ गए है।मुझे एक रुपए की सहायता राशि नही मिली है।दवाइयों का खर्च खुद वहन करना पड़ रहा है। भर्ती कराने के बाद कोई जंगल का अधिकारी लौट कर नही आया।
तो क्या बाघिन को लगी आंतरिक चोट
मझखेता में 8 अक्टूबर को चरवाहे पर हमले के ठीक बाद 9 अक्टूबर को बाघिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना मानपुर बफर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर रही है।क्या बाघिन को लगी डंडे की चोट ने आंतरिक घायल कर दिया था…जिस कारण बाघिन की मौत हो गई।
क्या स्टार्वेशन से हुई बाघिन की मौत
अगर बाघिन पर डंडे से हमले की बात अगर सिरे से नकार दिया जाए तब भी Bandhavgarh प्रबंधन का गैरजिम्मेदाराना रवैये पर पर्दा नही डाला जा सकता है।प्रबंधन ने खुद माना है कि बाघिन डॉटी का जन्म वर्ष 2011-12 में मगधी जोन में प्रसिद्ध पटिहा मादा एवं ब्लू आई नर की संतान के रूप में हुआ था। डॉटी की उम्र लगभग 14 साल हो गई थी। आमतौर पर बाघ का जीवन 10 से 15 साल ही रहता है।जीवन के अंतिम दौर में बाघ शिकार नही कर पाते है।तो क्या 14 साल की बाघिन डॉटी स्टार्वेशन यानी भुखमरी से उसकी मौत हो गई ???क्या बाघिन ने भूख के कारण ही चरण सिंह पर हमला किया था।उम्रदराज बाघिन की अगर प्रबंधन चिंता कर लेता तो बाँधवगढ़ को डी1 जैसे बाघ को देने वाली बाघिन की शायद आज मौत न हुई होती।
अपनी डफली अपना राग
हर बाघ की मौत के बाद हर घटना को सामान्य बताकर प्रबंधन भले ही मामले से इतिश्री कर लेता है लेकिन प्रबंधन को यह नही भूलना चाहिए कि इन्ही बाघों के कारणों से हर पर्यटन सत्र में करोड़ो की आमदनी होती है।अगर डॉटी को किसी इनक्लोजर में रखकर उसके अंतिम दिनों में उसके भरपेट फीड दिया गया होता तो शायद आज बाँधवगढ़ की वह बाघिन मौत का मुंह न देखती जिस बाघिन को देखने के लिए देश विदेश के पर्यटक घण्टो जंगल मे टकटकी लगाकर बैठे रहते थे।
मामले में संतोषजनक बात यह है प्रबंधन ने दावा किया है कि NTCA की SOP का पालन करते हुए सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी एवं विकास खंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शव विच्छेदन एवं शव परीक्षण की कार्यवाही की गई।पूरे कार्यवाही की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी करायी गयी है। अग्रिम जांच हेतू आवश्यक नमूने संकलित कर विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं।रिपोर्ट्स आने के बाद मौत के असल कारणों का पता लग पाएगा।


