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MP News : 56 करोड़ बाजार मूल्य की भूमि को कराया गया अतिक्रमण मुक्त

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Dec 31, 2022 3:24 AM IST

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MP News :खरगोन शहर के मध्य कई महत्वपूर्ण कार्यालयों और बस स्टैंड के पास वाली 22780 वर्गफीट मूल्यवान भूमि का शुक्रवार को शासकीय अधिपत्य में लिया गया। राजस्व पुलिस और नगर पालिका की संयुक्त कार्यवाही में महिला सभा परिसर के सभी भवनों को सीलबंद कर अधिपत्य में लेने की कार्यवाही की गई। महिला सभा परिसर स्थित बाल कल्याण समिति, भोजनशाला एक अन्य खाली भवन तथा एक अतिरिक्त भवन के चार कक्षों व हॉल को सीलबंद कर अधिपत्य में लिया गया। इसके अलावा बस स्टैंड की ओर निर्मित 14 दुकानों को खाली कराकर अधिपत्य में लिया गया। एसडीएम श्री ओमनारायण सिंह ने बताया कि अधिपत्य में ली गई भूमि शासन की गाइड लाइन के अनुसार 42 करोड़ 10 लाख 26 हजार रुपये की मूल्यवान भूमि है। जबकि बाजार मूल्य के अनुसार 56 करोड़ रुपये से अधिक कीमत है। कार्यवाही के दौरान एसडीओपी श्री राकेश मोहन शुक्ला, नगर पालिका सीएमओ श्रीमती प्रियंका पटेल, तहसीलदार श्री योगेंद्र मौर्य, टीआई बीएल मंडलोई, नायब तहसीलदार और आरआई मौजूद रहे।MP News : 56 करोड़ बाजार मूल्य की भूमि को कराया गया अतिक्रमण मुक्त

इसलिए लिया शासकीय अधिपत्य :

एसडीएम श्री ओमनारायण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला सभा को कल्याणकारी कार्यकर्माे के लिए खसरा नम्बर 141/2 से पहली बार 1973 में और दूसरी बार 1977 में निराश्रित बालगृह को शर्ताे के अधीन कुल 22780 वर्गफीट भूमि आवंटित की गई थी। इसके बाद 2015 में भवन जीर्णशीर्ण होने से यहां गतिविधियां बंद कर दी गई थी। संस्था द्वारा भूमि आवंटन शर्ताे का उल्लंघन कर 14 दुकानों का भी बिना अनुमति के निर्माण कर लिया था। 26 दिसम्बर को कलेक्टर श्री कुमार पुरुषोत्तम ने शासकीय अधिपत्य में लेने के लिए खरगोन एसडीएम को आदेशित किया था। न्यायालय की सुनवाई के दौरान अनावेदकों ने लिखित रूप में दिए जवाब में स्वीकार किया कि भूमि का प्रयोजन समाप्त होने पर शासन पक्ष में लेने पर कोई आपत्ति नही है।

इस उद्देश्य से दी गई थी भूमि :

खरगोन एसडीएम द्वारा कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार महिला सभा को 1973 और 1977 में परिवार परामर्श केंद्र, सिलाई कड़ाई केंद्र, कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र तथा निराश्रित बालगृह संचालित करने के लिए भूमि आवंटित की गई थी। जिसका संचालक वर्ष 2015 में भवन जीर्ण शीर्ण होने से बंद करना बताया गया था। इसके बाद कलेक्टर न्यायालय द्वारा 3 दिनों का समय देते हुए शासकीय अधिपत्य में लेने के आदेश लिए थे। इसी के पालन में राजस्व विभाग ने पुलिस और नगर पालिका के साथ यह कार्यवाही की।

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