Bandhavgarh News : आज बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक कॉलरयुक्त मादा बाघिन का रेडियो कॉलर सुरक्षित रूप से हटाकर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर अंतर्गत बीट बरबसपुर में आज एक महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रबंधन एवं संरक्षण कार्यवाही सफलतापूर्वक संपन्न की गई जिसमें एक कॉलरयुक्त मादा बाघिन का रेडियो कॉलर सुरक्षित रूप से हटाकर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
कॉलरयुक्त मादा बाघिन को पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर उसका खराब हो चुका रेडियो कॉलर निकाल दिया गया। आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण एवं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचारात्मक परीक्षण के उपरांत बाघिन को पूर्णतः होश में आने के बाद उसके प्राकृतिक वन क्षेत्र में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
उल्लेखनीय है कि उक्त बाघिन का रेडियो कॉलर विगत दिनों से कार्य नहीं कर रहा था, जिसके कारण उसकी लोकेशन प्राप्त नहीं हो रही थी। इसके बाद वन विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर सघन खोज एवं मॉनिटरिंग अभियान संचालित किया गया। इस अभियान में प्रशिक्षित हाथियों, वन अमले, वन्यजीव विशेषज्ञों, ट्रैप कैमरों, वीएचएफ उपकरणों तथा अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया। लगातार वर्षा जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद लगभग 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सतत खोज एवं निगरानी की गई। अंततः बाघिन को उसके होम रेंज में सुरक्षित एवं पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में 12.7.26 को ढूंढ लिया गया, जिसके उपरांत प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव से अनुमति प्राप्त कर रेडियो कॉलर हटाने की कार्ययोजना तैयार की गई।
विगत दो दिन से सघन सर्च के बाद आज रेस्क्यू एवं रेडियो कॉलर हटाने की कार्रवाई पीएफ-126, बीट बरबसपुर, झांझहार, धमोखर बफर में क्षेत्र संचालक की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। अभियान में उप संचालक, सहायक संचालक धमोखर बफर, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी धमोखर बफर के नेतृत्व एवं उपस्थिति में कुल 63 अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सहभागिता निभाई। लक्ष्मण, सूर्या, रामा तथा श्याम हाथी एवं उनके महावत की महत्तवपूर्ण भूमिका रही.
संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया गया। परीक्षण में बाघिन स्वस्थ पाई गई। रेडियो कॉलर हटाने के पश्चात उसे पूर्णतः होश में लाया गया तथा उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से मुक्त कर दिया गया। मुक्त करने के बाद बाघिन सामान्य रूप से वन क्षेत्र की ओर चली गई, जिससे अभियान की सफलता सुनिश्चित हुई।


