शहडोल। इंसान अपने प्रियजनों को खोने के बाद शोक मनाता है, उनकी यादों को संजोता है और उन्हें अंतिम विदाई देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बेजुबान कहे जाने वाले हाथी भी अपने साथी की मौत को महसूस करते हैं। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी वन परिक्षेत्र में करंट से मारे गए 15 वर्षीय हाथी को जब जमीन में दफनाया गया, दफनाए जाने के बाद उसी झुंड के हाथियों का वहां पहुंचना और उस स्थान पर ठहरना चर्चा का विषय बन गया है।उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा भी कहती हैं कि हाथियों में इंसानों की तरह शोक व्यक्त करने जैसा सामाजिक व्यवहार देखने को मिलता है। यह सिर्फ एक हाथी की मौत की कहानी नहीं, बल्कि जंगल के उन रिश्तों की कहानी है, जिन्हें समझना आज भी इंसान के लिए चुनौती है।
मामला पश्चिम ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक पीएफ-77, बीट चचाई के अंतर्गत ग्राम चंदौली के वार्ड नंबर-07 स्थित राजस्व क्षेत्र का है। यहां खेत के पास बोरवेल के नजदीक करंट लगने से 15 वर्षीय नर मकना हाथी की मौत हो गई थी। घटना के बाद वन विभाग ने नियमानुसार विधिवत हाथी के शव को दफना दिया था…
लेकिन इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने वन्यजीवों के व्यवहार और उनके आपसी संबंधों को लेकर लोगों का ध्यान खींचा। जिस झुंड का मृत हाथी हिस्सा था, उसी झुंड के हाथी उस स्थान पर पहुंचे, जहां उनके साथी को दफनाया गया था,मृत हाथी की कब्र के पास झुंड की मौजूदगी को उसके प्रति भावनात्मक जुड़ाव और संभावित शोक व्यवहार के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर वन मंडलाधिकारी (DFO) तरुणा वर्मा ने इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि जिस तरह मनुष्य अपने प्रियजनों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हैं, उसी तरह हाथियों में भी शोक व्यक्त करने जैसा व्यवहार देखने को मिलता है। हाथियों का बुनियादी स्वभाव सामाजिक होता है। वे झुंड में रहते हैं और उनके बीच गहरे सामाजिक संबंध होते हैं।
DFO के अनुसार, हाथियों में एन्सेस्ट्रल मेमोरी यानी पूर्वजों से जुड़ी स्मृति और सामाजिक व्यवहार से संबंधित विशेषताएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। जिस तरह मनुष्य किसी की मृत्यु के बाद शोक सभा में शामिल होते हैं, उसी तरह हाथियों में भी अपने मृत साथी के प्रति विशेष व्यवहार देखने को मिल सकता है।
चंदौली की यह घटना एक बार फिर बताती है कि वन्यजीवों की दुनिया केवल जीवन और संघर्ष तक सीमित नहीं है। हाथियों का सामाजिक जीवन, उनकी स्मरण क्षमता और अपने झुंड के सदस्यों के प्रति व्यवहार उन्हें बेहद खास बनाता है। हालांकि, केवल किसी स्थान पर पहुंचने के आधार पर उनके व्यवहार को निश्चित रूप से शोक सभा कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा, लेकिन यह दृश्य हाथियों के आपसी जुड़ाव की संवेदनशील तस्वीर जरूर पेश करता है।
DFO तरुणा वर्मा ने बताया कि जिस दिन हाथी की मौत हुई थी, उस दिन भी हाथियों का झुंड वापस उसी स्थान पर पहुंचा था। अब दूसरे दिन भी उसी झुंड के हाथियों का उस जगह पहुंचना उनके सामाजिक व्यवहार का हिस्सा हो सकता है। हाथियों का स्वभाव सामाजिक होता है और वे अपने साथियों के प्रति गहरा जुड़ाव रखते हैं। हाथियों में एन्सेस्ट्रल मेमोरी (पूर्वजों की याद) भी होती है। जिस तरह इंसान शोक सभा करते हैं, उसी तरह हाथी भी अपने मृत साथी के प्रति विशेष व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।

