Bandhavgarh News : वैसे तो इंसान हो या वन्यजीव आँखें तो दो ही होती है,शायद ही आपने किसी वन्य जीव या मानव की आपने 2 के अलावा 3 या चार आँखें देखी हो लेकिन आज हम चर्चा कर रहे है बाघों की जिनकी ताकात और स्फूर्ति का अंदाजा आप उसकी चाल से ही लगा सकते है।और आपने अमूमन बाघों की 2 आँखें ही देखी होंगी लेकिन ये चार आखों का क्या कॉन्सेप्ट है क्या बांधवगढ़ में ऐसे बाघ भी है जिनकी 4 आँखें है…आज इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे।
दरअसल बाघ जब जंगल मे कही भी खड़ा होता है या पानी पीता है तो बाघ की तस्वीरों में आपने देखा होगा कि बाघ पानी पीने के दौरान कितना चौकन्ना रहता है।बाघ भले ही पानी पी रहा होता है लेकिन बाघ की आँखें सामने से आने वाले खतरे को लेकर अलर्ट रहती है।लेकिन आपको पता होना चाहिए कि बाघ जितना आगे से आने वाले खतरे के लिए चौकन्ना रहता है उतना पीछे के संभावित खतरे को लेकर भी आगाह रहता है।और इसके लिए बाघ के कान के पीछे जो काले रंग में बना सफेद धब्बा बाघ की अन्य दो आँखों का काम करता है।अब आप सोच रहे होंगे क्या बाघ को इन सफेद धब्बों से भी दिखाई देता है तो इसका जवाब है बिल्कुल नही।दरअसल ये सफेद धब्बे बाघ के लिए नकली आखो का काम करते है।इन नकली आखों को ओसेली भी कहते है।
जब कोई वन्यजीव बाघ के पीछे होता है तो उसे लगता है कि बाघ उन पर नजर बनाए हुए है।बाघ की ये दो नकली आँखें बाघ की सुरक्षा के लिए बेहद काम मे आती है।

बाघ शावको के लिए संकेतक
बाघ की ये दो नकली आँखें बाघ शावको को अपनी माँ की से जंगल मे संपर्क साधने में खासकर जब वो दूर हो जंगल घना हो या फिर अंधेरे का समय हो उस समय बाघ शावक माँ की इन नकली आँखों का अनुसरण करता है।
बाघ जब खतरा महसूस करते है तब भी इन नकली आखों का प्रदर्शन कान घुमाकर अन्य वन्यजीवों को चेतावनी देने के उद्देश्य से करते है।
कुल मिलाकर बाघ के दोनों कान के पीछे बने विशेष धब्बे ही बाघ की अन्य दो आखों का काम करते है।
तो देखा आपने बाघ की 4 आखों का कॉन्सेप्ट कितना आश्चर्यचकित कर देने वाला है। बाघ यूं ही जंगल का राजा नही कहलाता।बाघ की ये तमाम खूबियां ही उसे जंगल का राजा घोषित करती हैं।















