मध्यप्रदेश में प्रदेश सरकार भले ही सुशासन के लाख दावे कर ले लेकिन भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं। ताजा मामला मध्य प्रदेश के खंडवा का है जहां एक नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पर्यवेक्षक की घूसखोरी से परेशान होकर के उसने लोकायुक्त पुलिस की शरण ली।
क्या है पूरा मामला
खंडवा में लोकायुक्त इंदौर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथों ट्रैप किया है। आरोप है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति के एवज में 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। पहली किस्त के तौर पर 4 हजार रुपए लेते हुए आरोपी पर्यवेक्षक को ग्राम पंचायत रोशनी में पकड़ा गया। कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
नियुक्ति के बदले दो 50 हजार
लोकायुक्त इंदौर की टीम ने खालवा सेक्टर लखनपुर बंदी में पदस्थ पर्यवेक्षक संतोष कोचले को रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। शिकायत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरन वाड़िबा ने की थी। शिकायत में बताया गया कि नियुक्ति के बदले 50 हजार रुपए की मांग की जा रही है। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया। शुक्रवार को गठित ट्रैप दल ने ग्राम पंचायत रोशनी में कार्रवाई करते हुए संतोष कोचले को 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत कार्रवाई जारी है।
इस टीम ने की कार्यवाही
ट्रैप टीम में कार्यवाहक निरीक्षक प्रतिभा तोमर, आशुतोष मिठास सहित कई अधिकारी और आरक्षक शामिल रहे। लोकायुक्त संगठन ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। आमजन से भी अपील की गई है कि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगे तो लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराएं।

