आपने कहीं न कहीं पढ़ा होगा कि महाकाल उज्जैन नगरी के एकमात्र राजा हैं।ऐसा माना जाता है कि बाबा महाकाल के अलावा उज्जैन में सिर्फ और सिर्फ राजा विक्रमादित्य ही ऐसे राजा थे जिन्होंने उज्जैन में रात बिताई है।इसके अलावा जिस किसी राजा ने यहाँ रात बिताने की कोशिश की तो उसका राजपाट छूट गया जाता था।इस बात की चर्चा तब और शुरू हुई जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा जिन्होंने उज्जैन में रात बिताई थी उन्हें मात्र 20 दिनों के अंदर अपनी कुर्सी गवानी पड़ गई थी। एक और मामला मोरारजी देसाई से जुड़ा है,इन्होंने ने भी बाबा महाकाल के दर्शन उपरांत उज्जैन में रात गुजारी थी और ठीक अगले दिन देसाई की सरकार गिर गई थी। एक परिणाम 20 दिन में दूसरा परिणाम ठीक दूसरे दिन तो क्या कुछ ऐसा ही होने वाला है या मोहन यादव ने जो मिथक तोड़ा है उसके पहले हुई दोनो घटना सिर्फ एक इत्तेफाक ही थी।
अब ये महज संयोग था या बाबा महाकाल से जुड़ी इस कथा का प्रभाव… इस बात को लेकर नेटिजन्स के अलग-अलग मन्तव्य हो सकते है लेकिन एक बार यह चर्चा इसलिए शुरू हुई है क्योंकि बीते 2 दिनों के भीतर उज्जैन से ताल्लुक रखने वाले डॉ मोहन यादव पर बड़े आरोप-प्रत्यारोप लग रहे है।
क्या ये महज संकेत है।क्योंकि जब डॉ मोहन यादव प्रदेश के सीएम के रूप में घोषित हुए थे आपको याद होगा उस दिन भी इस खबर ने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी।तब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था कि मैं भगवान महाकाल का बेटा हूँ। बाबा ने मुझे मुख्यमंत्री बना कर इस डर को खत्म करने का काम दिया है।
हालांकि उन्होंने इस मिथक को सिंधिया महाराज दौलत राव जी की साजिश भी बताया था उन्होंने कहा था कि उन्हें जब अपनी राजधानी उज्जैन से ग्वालियर करनी थी तो उन्होंने कह दिया था कि जो राजा यहां रात रुकेगा तो निपट जाएगा। उन्होंने कहा था कि की सिंधिया राजघराने की राजनीतिक रणनीति को हम सब जाने अनजाने में मान रहे थे।मैं बाबा महाकाल का बच्चा हूँ।
भविष्य में क्या होगा यह तो आनेवाला समय ही बताएगा लेकिन जिस सिंधिया राजघराने को लेकर डॉ मोहन यादव ने टिप्पणी की थी संयोग से उनके वंशज आज भी प्रासंगिक है और बड़ी बात यह है कि वो भी भाजपा में ही हैं…


