Umaria News : उमरिया जिले के कोतवाली थानांतर्गत सिविल लाइन चौकी क्षेत्र में उमरिया और चंदिया के बीच ग्राम भरौला में सिद्धबाबा मंदिर के ठीक सामने 8 और 9 जुलाई की दरमियानी रात 2 से 3 बजे के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर खड़े ट्रक क्रमांक MP21H1453 से एक कार क्रमांक MP18ZE9677 पीछे से जाकर टकरा गई।उक्त कार अनूपपुर जिले के करन पठार चौकी अंतर्गत ग्राम लीला टोला से चित्रकूट जा रही थी।
हादसे में 4 की मौत 1 घायल है।
कौन -कौन थे कार में सवार
दरअसल कार में अनूपपुर जिले ग्राम लीला टोला की सरपंच झुमली बाई पति बेन सिंह के बेटे कुलपत सिंह की पत्नी सविता धुर्वे उनका 3 साल का बेटा रुद्र प्रताप सिंह और पत्नी के भाई की 2 बेटियाँ कार में सवार थी।कार में ड्राइवर के ठीक बगल में कुलपत सिंह बैठे थे।पीछे की सीट में उनकी पत्नी सविता धुर्वे जो कि शहडोल जिले के चचाई थाना में कॉन्स्टेबल के पद पर पदस्थ थी,उनके साथ सविता धुर्वे के भाई प्रीतम मार्को की दो बेटियां खुशबू मार्को पिता उम्र 22 वर्ष और प्रियंका मार्को लउम्र 24 वर्ष बैठी थी।
कैसे हुई घटना
घटना स्थल पर मौजूद लोगों की माने तो सड़क पर खड़े ट्रक से कार पीछे से जा टकराई है।घटना के दौरान कार का ड्राइवर घायल कार सवारों को निकालने की बजाय मौके से फरार हो गया।घटनास्थल पर कार में ड्राइवर सीट के बगल में बैठे कुलपत सिंह बुरी तरह फंस गए।जिन्हें सिविल लाइन चौकी प्रभारी भूपेंद्र पन्त और उनकी टीम ने रेक्सयू कर सुबह 7 बजे के आसपास बाहर निकाला। घटना के तुरंत बात रात 3 बजे अन्य 4 घायलो को 108 एम्बुलेंस ने जिला चिकित्सालय उमरिया पहुँचा दिया था।जिससे खुशबू मार्को की जान बच गई।खुशबू मार्को को जबलपुर मेडकिल कालेज रेफर कर दिया गया है।
क्यों हुई घटना
उमरिया जिले में अगर एक आम नागरिक से आप पूछेगें की जिले में एक्सीडेंटल हॉटस्पॉट कहा है तो लोग बता देंगे कि “भरौला” दरअसल भरौला क्षेत्र में सड़क किनारे खड़े ट्रक दुर्घटना का कारण बनते है।इस घटना में भी यही पुनरावृत्ति हुई सड़क किनारे खड़ा ट्रक दुर्घटना का कारण बना। साथ ही ट्रक के पीछे कोई भी संकेतक रेडियम नही लगा था।
वर्क फार्म होम से चलता है जिले का RTO विभाग
उमरिया जिले में जिला परिवहन अधिकारी के रूप में पदस्थ श्रीमती राम दुबे जिला मुख्यालय में प्रति सोमवार ही उपलब्ध रहती हैं। यही कारण है कि जिले में यातायात व्यवस्था जिले में बिड़गी हुई है।स्कूल बस से लेकर यात्री बसों का यही हाल है।जिले का हर एक विभागाध्यक्ष जिले में रहकर काम करते है लेकिन RTO जिला उमरिया की जबसे जिले में जॉइनिंग हुई है।हालात ऐसे ही है।अगर जिला कलेक्टर उमरिया इस गैरमौजूदगी की गोपनीय जांच करवाई जाए तो किए जा रहे दावे खोखले साबित होंगे।


