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गाल में त्रिशूल छेदकर पारंपरिक काली नृत्य के साथ उचेहरा धाम में हुआ जवारा विसर्जन

अगर आपके पैरों में कोई कांटा चुभ जाए या फिर की लग जाए तो उसका दर्द आपने महसूस ही किया होगा। लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर किसी के गाल में त्रिशूल छेदकर जब किसी को सामान्य तरीके से चलाया जाए तब उसकी स्थिति क्या होगी। ऐसी ही शानदार तस्वीर मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत ग्राम उचेहरा से आई हैं ।जहां जवारा विसर्जन के दौरान मां ज्वाला की भक्ति में ली भक्तों के द्वारा अपने गालों में त्रिशूल छेद कर उन्होंने मां ज्वाला के प्रति आस्था व्यक्त की है।ज्वाला धाम की तस्वीरों को देख करके हर कोई दंग रह गया है।

दरअसल मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के नौरोजाबाद तहसील अंतर्गत स्थित ग्राम उचेहरा में ज्वाला मंदिर की ख्याति इन दोनों मध्यप्रदेश सहित आसपास की प्रदेशों में बड़ी तेजी से फैल रही है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु जवारा विसर्जन के दौरान मां उचेहरा के मंदिर प्रांगण में पहुंचे हुए थे। नौरोजाबाद टीआई अरुणा द्विवेदी और एसडीपी पाली शिवचरण बोहित की मौजूदगी में कड़ी पुलिस व्यवस्था के बीच जवारा विसर्जन का कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम से किया गया है।

मां ज्वाला की भक्ति में लीन भक्तों ने अपने गाल में त्रिशूल फंसा करके मंदिर प्रांगण से लेकर के मंदिर की परिक्रमा करते हुए नदी तक पहुंचे जहां हजारों की संख्या में जवारा का विसर्जन किया गया और वही गाल से त्रिशूल निकाला गया। भक्तों के गाल में त्रिशूल उसके साथ में माता की भक्ति में भाव विभोर श्रद्धालुओं का जमवाड़ा और हरे जवारों के कलश की हरियाली का मंत्र मुग्ध कर देंने वाला दृश्य जिसने भी देखा वह माता ज्वाला की भक्ति में भाव विभोर हो गया। गाल में त्रिशूल फॅसाकर मां ज्वाला के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते कई भक्त नजर आए। अब इसे आस्था कहें या अंधविश्वास जिन्होंने भी इस दृश्य को देखा वह भाव विभोर हो गया।

गाल में त्रिशूल छेदकर पारंपरिक काली नृत्य के साथ उचेहरा धाम में हुआ जवारा विसर्जन
गाल में त्रिशूल छेदकर पारंपरिक काली नृत्य के साथ उचेहरा धाम में हुआ जवारा विसर्जन

मां ज्वाला की भक्ति का ऐसा प्रभाव की भक्तों ने जब अपने गालों में त्रिशूल धारण किया तो उनके गाल से ना तो खून निकला और ना ही उन्हें दर्द हुआ और एक बड़ी बात ना ही उन्हें कोई भी एंटीबायोटिक दवा लेने की जरूरत पड़ती है। मात्र मां ज्वाला का भभूत लगाने से उनके घाव भर जाते हैं और निशान मिट जाता है। इसी भक्ति भावना के साथ में हर वर्ष यहां जवारों का विसर्जन होता है।

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