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बांधवगढ़ से निकला मौत का टस्कर, मैहर में ग्रामीण को कुचला; अब तक उतार चुका है 4 को मौतें के घाट

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Sep 10, 2026 8:57 AM IST

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Bandhavgarh News : उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाईगर रिसर्वे क्षेत्र से निकलकर बाणसागर के बैक वाटर के जंगल से होते हुए मैहर जिले के रामनगर विकास खण्ड के पुरैना पंचायत के सिंगपुर मौहारी में एक ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया।उक्त हाथी की पहचान बांधवगढ टाईगर रिज़र्व के जंगल में छोड़े गए हाथी कॉलर 4 के रूप में हुई है।घटना के बाद मैहर जिले में हड़कंप मच गया।जानकारी के बाद बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व की टीम मैहर पहुँची है।कैसे हुई घटना

मिली जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व क्षेत्र का एक 10 वर्षीय टस्कर हाथी बाण सागर के बैक वाटर एरिया के जंगल से होता हुआ मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में पहुँच गया।जानकारों की माने तो सिंगपुर मौहारी के वन क्षेत्र में कुछ ग्रामीण बस गए है।इन्ही ग्रामीणों में एक कंछेदी यादव के घर में अनाज खाने के उद्देश्य से जँगली हाथी घर की ओर बढ़ा तभी कंछेदी यादव सामने आ गया और हाथी के हमले से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।पुरैना सरपंच बीपेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया की कंछेदी यादव पर हमला कर उसे मौत के घाट उतारने के बाद हाथी ने अन्यकई घरों को गिरा दिया।घटना 7 सितंबर की रात की बताई जा रही है।

कौन है कॉलर 4 हाथी

उक्त मामले में फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय बताते है कि इसी वर्ष 23 मई के आसपास इस जंगली हाथी ने शहडोल अनूपपुर में काफी उत्पात मचाया था।उक्त क्षेत्र में इस हाथी ने लगभग 3 लोगो को मौत के घाट उतारा था।बांधवगढ टाईगर रिज़र्व की रेक्सयू टीम ने केशवाही के जंगल से इस जंगली हाथी का रेक्सयू पर इसे रेडियो कॉलर पहना कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली वन परिक्षेत्र में छोड़ा गया था। चूंकि यह नर टस्कर हाथी है। ये नर हाथी लांग रेंज की यात्रा करते है।अगर इनके रास्ते मे कोई आता है तो अक्सर ऐसी घटनाएं हो जाती है।

तो क्या रेक्सयू टीम लेकर आएगी बांधवगढ़

उक्त मामले में जानकारी देते हुए फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाईगर रिज़र्व अनुपम सहाय ने बताया कि कॉलर4 हाथी की वर्तमान में मैहर जिले के अमरपाटन वन परिक्षेत्र में है। बांधवगढ़ से मैहर पहुँची रेस्क्यू टीम ने स्थानीय वन अमले को ट्रेनिंग दी है कि किस तरीके से इस जंगली हाथी की मॉनिटरिंग करनी है। उन्हें बताया गया है कि जब गांव में इसकी आमद हो जाए तो उसे कैसे जंगल का रास्ता दिखाना है। उन्होंने बताया कि इस जंगली हाथी को फिलहाल अमरपाटन की जंगल में ही विचरण करने के लिए छोड़ दिया गया है। स्थिति स्पष्ट करती हूं उन्हें कहा कि इस जंगली हाथी को शहडोल अनूपपुर की जंगल से पकड़ा गया था और बांधवगढ़ में लाया गया था लेकिन लगातार जंगली हाथी की मूवमेंट बनी हुई है ऐसे में अगर इसे रेस्क्यू करके बांधवगढ़ भी जाएंगे तो आने वाले समय फिर से यह इस क्षेत्र में आ जाएगा। इसलिए निर्णय लिया गया है कि अभी साथी को स्थानीय प्रबंधन के द्वारा।इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी।

तो क्या फेल हो गया मॉनिटरिंग सिस्टम?

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों के प्रबंधन को लेकर लगातार सालभर कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। प्रबंधन के द्वारा जंगली हाथियों की निगरानी और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए अलग से पेट्रोलिंग टीम भी गठित है। खासकर कॉलर आईडी लगाए गए हाथियों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग किए जाने का दावा भी किया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस जंगली हाथी को लेकर यह घटना सामने आई, उसकी मॉनिटरिंग में प्रबंधन के द्वारा कहीं कोई चूक तो नहीं हुई?

यदि हाथी के मूवमेंट की जानकारी समय रहते मिल जाती और उसके दूसरे जिले की सीमा की ओर बढ़ने की सूचना तत्काल संबंधित वन अमले को दी जाती, तो संभव है कि वन विभाग पहले से सतर्क होकर आवश्यक सुरक्षा एवं निगरानी के इंतजाम कर सकता था। और इस जनहानि को रोका जा सकता था।

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