Umaria News : नौरोजाबाद थानांतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर करकेली स्थित जैन पेट्रोल पंप और RSIT स्कूल के ठीक बीच मे आज 15 जुलाई की शाम 7 बजे के आसपास अज्ञात वाहन की ठोकर से एक शासकीय शिक्षक की दुःखद मौत हो गई है।
क्या है पूरा घटनाक्रम
दरअसल आज शाम 7 बजे अपने घर की ओर जा रहे 42 वर्षीय बुढ़ान-रामपुर निवासी रामसखा पिता मन्नू बैगा के दो पहिया वाहन रजिस्ट्रेशन क्रमांक MP54MD 0338 को किसी अज्ञात वाहन ने ठोकर मार दी।हादसे में रामसखा के सिर पर गंभीर चोट लगने से मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े।उमरिया से अपने गृह नगर की ओर जा रहे जाहिद खान के द्वारा घटनास्थल पर रुककर तत्काल 108 एम्बुलेंस वाहन को काल किया गया।चूंकि संयोगवश जैन पेट्रोल पंप में फ़्यूलिंग के लिए जननी एक्सप्रेस खड़ी थी।भोपाल से कॉल मिलने पर जननी एक्सप्रेस चालक सूरज बर्मन ने घायल रामसखा बैगा को जिला चिकित्सालय उमरिया पहुँचाया।जहाँ प्राथमिक जाँच के बाद ड्यूटी डॉक्टर ने घायल रामसखा बैगा को मृत घोषित कर दिया।बताया जा रहा है है बतौर शासकीय शिक्षक रामसखा बैगा रहठा-कछारी में पदस्थ थे।घटना की सूचना परिजनों को दे दी गई है।शव जिला चिकित्सालय की मरच्यूरी में शिफ्ट कर दिया गया है।अलसुबह पीएम की कार्यवाही होगी।
घटनास्थल पर हो चुकी हैं दर्जनों घटनाएँ
करकेली में जिस स्थान पर शिक्षक रामसखा बैगा की दुखद मौत हुई है,यह कोई पहली घटना नही है।दुर्घटनाओं के इस हॉट स्पॉट में न जाने कितने घरों के चिराग बुझ गए है। उमरिया – शहडोल मार्ग पर ग्राम करकेली में जैन पेट्रोल पंप के आसपास घटनाओं की लगातार पुनरावृत्ति क्यों हो रही है यह भले ही जाँच का विषय है,लेकिन मोरल ऑफ द स्टोरी यह है कि अब तक इस स्थल का बारीकी से अध्ययन नही किया गया।अगर किया गया होता तो घटनाओं की इस पुनरावृत्ति पर अब तक लगाम लग गई होती।
सड़क के ठीक किनारे पर है विद्यालय
ग्राम करकेली में जैन पेट्रोल पंप के ठीक बगल में पाली रोड में ही राष्ट्रीय राजमार्ग 43 के ठीक बगल में एक विद्यालय संचालित है।इस विद्यालय की जब दोपहर 2:30 के आसपास जब छुट्टी होती है तो राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर बेरिकेट्स लगा दिए जाते है।यह क्रम स्कूल लगने और छुट्टी होने पर दोनो समय चलता है।अगर राष्ट्रीय राजमार्ग 43 से गुजर रहे लगातार वाहनों से कोई बड़ी घटना हो जाए तो इसकी जबावदेही तय करना बड़ा मुश्किल हो जाएगा।वैसे तो विद्यालय संचालन की परमिशन देने के दौरान कई बिन्दुओ पर विद्यालय भवन की जाँच होती है।लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे व्यस्ततम मार्ग के किनारे संचालित ऐसे विद्यालयों को कैसे परमिशन मिल जाती है। यह बड़ा यक्ष प्रश्न है।



