Shorts Videos WebStories search

—Advertisement—

टाईगर स्टेट के साथ-साथ“घड़ियाल स्टेट है मध्यप्रदेश

Author Picture
Editor
Jan 4, 2025 10:15 AM IST

[inb_subtitle]

टाईगर स्टेट के साथ-साथ“घड़ियाल स्टेट है मध्यप्रदेश

—Advertisement—

वन्य जीवन से समृद्ध मध्यप्रदेश बाघ प्रदेश, चीता प्रदेश, तेंदुआ प्रदेश के साथ अब घड़ियाल प्रदेश भी है। यहाँ गिद्धों का आदर्श रहवास है। देश में घड़ियालों की संख्या 3044 है और उसमें से मध्यप्रदेश में 2456 है। इस प्रकार देश में 80 प्रतिशत से अधिक घड़ियालों का घर है मध्यप्रदेश। यहाँ पर डॉल्फिन का भी रहवास है। मध्यप्रदेश में अथक प्रयासों से घड़ियालों के संरक्षण का कार्य किया गया। उनके प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित बनाया गया और अवैध शिकार पर रोक लगायी गयी। साथ ही अवैज्ञानिक मछली पकड़ने के तौर-तरीकों को बंद किया गया।

435 किलोमीटर क्षेत्र को किया चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित

चंबल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र को चंबल घड़ियाल अभयारण्य घोषित किया गया है। चंबल नदी मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बहती है। नदी में घड़ियालों की वृद्धि की वजह देवरी ईको सेंटर है। इस सेंटर में घड़ियाल के अण्डे लाये जाते हैं और उनसे बच्चे निकलने के बाद उनका पालन किया जाता है। बच्चों की आयु 3 साल होने पर उन्हें नदी में छोड़ दिया जाता है। प्रतिवर्ष 200 घड़ियाल को “ग्रो-एण्ड-रिलीज’’ कार्यक्रम के तहत नदी में छोड़ा जाता है। स्वच्छ नदियों में रहना और नदियों को स्वच्छ रखना घड़ियालों की विशेषता है। इसी वजह से कई राज्यों से इसकी माँग की जाती है। चंबल नदी के घड़ियाल प्रदेश एवं देश की नदियों की शान बढ़ा रहे हैं। जलीय जीव घड़ियाल नदियों का ईको सिस्टम मजबूत करते हैं।

देश में वर्ष 1950 और 1960 के दशक के बीच घड़ियालों की आबादी में 80 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। भारत सरकार ने 1970 के दशक में इसे संरक्षण प्रदान किया। संरक्षण समूहों ने प्रजनन और पुन: प्रवेश कार्यक्रम शुरू किये। हालांकि, वर्ष 1997 और वर्ष 2006 के बीच घड़ियालों की आबादी में गिरावट आयी।

घड़ियाल को गेवियलिस गैंगेटिकस, जिसे गेवियल या मछली खाने वाला मगरमच्छ भी कहा जाता है। वयस्क मादा घड़ियाल 2.6 से 4.5 मीटर (8 फीट 6 इंच से 14 फीट 6 इंच) लम्बी होती है और नर घड़ियाल 3 से 6 मीटर (9 फीट 10 इंच से 19 फीट 8 इंच) लम्बे होते हैं। वयस्क नर के थूथन के अंत में एक अलग सिरा होता है, जो घड़ा नामक मिट्टी के बर्तन जैसा दिखता है, इसलिये इसका नाम घड़ियाल पड़ा। घड़ियाल अपने लम्बी, संकरी थूथन और 110 आपस में जुड़े तीखे दाँतों की वजह से मछली पकड़ने में सहायक होते हैं।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना के लिये 30 सितम्बर, 1978 में भारत सरकार की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। घड़ियालों का कुनबा बढ़ाने के लिये मुरैना में चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी के देवरी घड़ियाल सेंटर में हेचिंग सेंटर शुरू किये जायेंगे। इन नदियों के किनारे बसे 75 गाँव के लोगों को जागरूक किया गया है। गाँव के 1200 लोग घड़ियाल मित्र के रूप में वन विभाग के साथ काम कर रहे हैं।

पंजाब में वर्ष 1960-70 के बाद से वहाँ की नदियों से घड़ियाल गायब हो गये थे। चंबल नदी के देवरी घड़ियाल सेंटर से वर्ष 2017 में घड़ियाल पंजाब भेजे गये थे। वर्ष 2018 में 25 घड़ियाल सतलुज नदी के लिये भेजे गये और वर्ष 2020 में व्यास नदी के लिये 25 घड़ियाल भेजे गये थे।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य

चंबल नदी के पारिस्थतिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य बनाया गया था। तीन राज्यों में स्थित इस सेंचुरी का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी ‘स्कीमर’ है। यह गंगेटिक में पायी जाने वाली डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और साफ पानी के कछुओं के लिये प्रसिद्ध है। वर्ष 1979 में इसे राष्ट्रीय अभयारण्य घोषित किया गया था। यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में फैला हुआ है। अब तक प्रवासी एवं यहाँ रहने वाले पक्षियों की 290 से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। इस अभयारण्य का मुख्य आकर्षण घड़ियाल और दुर्लभ पक्षी “इण्डियन स्मीकर’’ है। यह दुर्लभ पक्षी गर्मियों के मौसम में यहाँ अपना घरोंदा बनाते हैं। देश में अपनी कुल आबादी के करीब 80 फीसदी स्मीकर चंबल सेंचुरी में प्रवास करते हैं।

Verified Source Google News www.khabarilal.net ✓ Trusted
Editor

खबर वह है,जिसे कोई दबाना चाहे। बाकी हर इवेंट विज्ञापन है।क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी समस्याओं को दीजिए खबरीलाल की आवाज ! बेरोकटोक कभी भी 9425184353 पर आप कॉल कर सकते है।किसी को नही बताऊंगा की जानकारी आपने दी है।… और पढ़ें

लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज

होम
MP ब्रेकिंग
powerफटाफट
Join करें
वेब स्टोरीज