Shorts Videos WebStories search

—Advertisement—

5 मुख्यमंत्री इस विधानसभा के दौरे के बाद गवां चुके है कुर्सी शिवराज सिंह चौहान को ज्योतिषाचार्य दे रहे आमंत्रण

Author Picture
Editor
May 22, 2023 1:07 PM IST

[inb_subtitle]

—Advertisement—

सीहोर जिले की इछावर विधानसभा की नगर सीमा के बारे एक मिथक जोरो से  प्रचलित है कि यहां की नगर सीमा में जो भी मुख्यमंत्री आता है उसे अपनी कुर्सी गवाना पड़ती है

ऐसा नहीं है कि देश में अनपढ़ या कोई निश्चित वर्ग की अंधविश्वास की चपेट में हो, यहां तो तकरीबन हर तबके का एक धडा हमेशा ही अंधविश्वास की डोरी से जुड़ा रहता है। जी हां, क्या आप जानते हैं कि देश में भी कई जगह ऐसी हैं, जहां बड़े से बड़ा राजनीतिज्ञ केवल इसलिए नहीं जाता क्योकि वहां से एक मिथक जुड़ा हुआ है।

मध्यप्रदेश में भी ऐसी एक जगह हैं जिनसे एक अजीब सा अंधविश्वास जुड़ा हुआ है। जिसे कोई भी सीएम तक तोड़ता हुआ नहीं दिखता। इस जगह के संबंध में कहा जाता है कि जब भी कोई सीएम यहां आता है तो उसकी कुर्सी चली जाती है।  हम बात कर रहे है मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की  इछावर विधानसभा की। यहां के इस मिथक को अब तक कोई भी मुख्य्मंत्री नही तोड़ पाय है

 इछावर के इस मिथक को तोड़ने का प्रयास तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 15 नवंबर, 2003 को किया था। वे इछावर में आयोजित सहकारी सम्मेलन में शामिल हुए थे। उन्होंने अपने भाषण में कहा था- मैं मुख्यमंत्री के रूप में इछावर के इस मिथक को तोड़ने आया हूं। इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई और मिथक बरकरार रहा।

इन मुख्यमंत्रियों को गंवानी पड़ी कुर्सी

12 जनवरी 1962 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. कैलाश नाथ काटजू विधानसभा चुनाव के एक कार्यक्रम में भाग लेने इछावर आए। इसके बाद 11 मार्च 1962 को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री होने के बाद भी वे जावरा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए, उन्हें डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे ने पराजित किया था।

1 मार्च 1967 को पं. द्वारका प्रसाद मिश्र यहां आए। सात मार्च को नए मंत्रिमंडल के गठन से उपजे असंतोष के चलते कांग्रेस में विभाजन हुआ और मिश्र को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा।

12 मार्च 1977 को कैलाश जोशी एक कार्यक्रम में भाग लेने यहां आए, लेकिन 29 जुलाई को उन्हें पद से हटना पड़ा।

6 फरवरी 1979 को वीरेंद्र कुमार सकलेचा तालाब का लोकार्पण करने आए। उन्हें 19 जनवरी 1980 को पार्टी के अंदरूनी कारणों की वजह से त्यागपत्र देना पड़ा।

15 नवंबर 2003 को दिग्विजय सिंह ने यहां आयोजित सहकारी सम्मेलन में शिरकत की, लेकिन अगले महीने हुए चुनाव में कांग्रेस जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा और उनकी कुर्सी जाती रही।

दो मुख्य दोष आए सामने आते है

पहला कारण अंक जोयतिष है जो कि इछावर का अंक 4 बताता है जो कि राहु का अंक है

दूसरा कारण इछावर के चारो कोनो पर शमसान ओर बावड़ी का होना जानकार बताते है कि इछावर में किसी की भी सत्ता कभी भी नही रही है चाहे वो मुगल हो या फिर अंग्रेज कोई भी इछावर पर सत्ता नही कर सका कुछ का कहना है कि इछावर की सीमा को तंत्र विधा के माध्यम से बांध गया है जिसके चलते प्रदेश का मुखिया का प्रवेश यहां वर्जित है अगर प्रदेश का मुखिया इछवार की धरती पर कदम रखेगा तो उसे 6 माह के अंदर अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा

ज्योतिष के अनुसार ये 2 कारण है जो कि प्रदेश के मुखिया पर भारी पड़ते है जिनके चलते प्रदेश के मुखिया यदि इछावर की धरती पर कदम रखते है हो उनकी सत्ता चली जाती है.

वही एक ज्योतिषाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए विधानसभा इछावर से जुड़े मिथक को बताया लेकिन उन्होंने कहा की वर्तमान में सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने अनेक जनहितकारी योजनाओ को लागू किया हैं उन्हें इस विधानसभा में आकर इस मिथक को तोडना चाहिए.

Verified Source Google News www.khabarilal.net ✓ Trusted
Editor

संजय विश्वकर्मा खबरीलाल न्यूज़ पोर्टल हिंदी में कंटेंट राइटर हैं। वे स्टॉक मार्केट,टेलीकॉम, बैंकिंग,इन्सुरेंस, पर्सनल फाइनेंस,सहित वाइल्ड लाइफ से जुड़ी खबरें लिखते हैं।संजय को डिजिटल जर्नलिज्म में 8 वर्ष का अनुभव है।आप संजय से 09425184353 पर सम्पर्क कर सकते हैं।… और पढ़ें

लेटेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज

Leave a Comment

होम
MP ब्रेकिंग
powerफटाफट
Join करें
वेब स्टोरीज