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जीवन मे जब धन और बल का घमंड हो जाए तो इन 3 स्थानों में जाकर करें आत्मावलोकन : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश

जिला जेल उमरिया में अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के उपलक्ष में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की मौजूदगी में कार्यक्रम संपन्न

अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में जिला जेल उमरिया में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष मानव अधिकार महेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष मानव अधिकार महेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज मैं जेल परिसर मे मुझे काफ सुखद अनुभूति हुई है।जिसे मैं शब्दो मे बयान नही कर सकता हूँ।मेरे सामने लगी टेबल क्लॉथ में लिखा है कि “How to Nice to meet You” तो मैं आपको सच बताऊ तो आज मुझे आप लोगो से मिलकर बड़ा अच्छा लगा।

जीवन मे जब धन और बल का घमंड हो जाए तो इन 3 स्थानों में जाकर करें आत्मावलोकन : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र सिंह तोमर ने आगे कहा कि आज हम इस विषय पर चर्चा नही करेंगे कि आप यहां क्यों आएं है किन परिस्थितियों में आए है।एक दृष्टांत सुनाते हुए प्रधान जिला एवं सत्र। न्यायाधीश उमरिया ने कैदियों को एक कहानी सुनाई उन्होंने कहा कि जब भीष्म पितामाह महाभारत के युद्व समर में जब बाणों की सैया पर लेटे हुए थे तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि हे पर प्रभु मेरी क्या अपराध है? मैंने तो अपने जीवन मे कभी कोई पाप कर्म नही किया है। फिर किस बात का यह दंड मुझे मिला है। मेरे शरीर मे इतने बाण लगे है तब भी मैं अपना शरीर नही त्याग पा रहा हूँ।

भीष्म पितामह के द्वारा जाहिर की गई ईक्षा पर भगवान कृष्ण ने उन्हें ऐसी शक्ति दी कि जिससे भीष्म पितामह अपने पूर्व जन्मों के बारे में देख,लेकिन जब उन्होंने अपने पूर्व जन्म में देखा तो कोई पाप नजर नही आया उसके बाद के जन्म में देखा तो कोई भी पाप उन्होंने नही किया था लेकिन जब पूर्व जन्मों को देखते देखते भीष्म पितामह 72 वें जन्म में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि उनके द्वारा 71 जन्म में किसी सर्प को लकड़ी से उछाल कर बमूर के काटो में फेंक दिया था। और जितने दिन तक वह सर्प काटों में उलझा रहा उतने दिनों तक भीष्म पितामह बाणों की सैया पर लेटे रहे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र सिंह तोमर ने आगे कहा कि जब जीवन मे व्यक्ति को धन और बल का घमंड बढ़ जाए तो उन्हें 3 स्थानों अस्पताल, श्मशान और जेल पर जाकर आत्मावलोकन करना चाहिए।आप श्मशान में देखगे की कितने कम उम्र के युवा साथी दुनिया को छोड़कर चले जाते है। अस्पताल में देखगे की धन होने के वावजूद लोगो को स्वास्थ्य लाभ नही मिल पा रहा है। जेल में आने के बाद आप अपने अंतर्मन में झांक कर आत्मावलोकन करिए,रोजगार के कुछ साधन सीखिए और जब आप अपना समय पूरा कर समाज मे जाए तो एक जिम्मेदार नागरिक बने साथ ही अपने घर परिवार और समाज के लिए कुछ सकारात्मक करने की कोशिश करें।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र सिंह तोमर ने आगे कहा की जिले में मानव अधिकार का संरक्षक होने के नाते मैं उमरिया जेल में बंद सभी बंदियों को वचन देता हूँ कि आपके अधिकारों की रक्षा करना मेरा दाईत्व है।आपके स्वास्थ्य की चिंता भी हम लगातार करते है।आप जब आप यहां से जाएं तो समाज के जिम्मेदार नागरिक बने।

किसी तरह की दिक्कत हो हमे बता सकते है।यहां रह कर समय का सदुपयोग करें यह से शसक्त होकर जाए और समाज मे अच्छे नागरिक के रूप में आप स्थापित हो आपके लिए प्रतिदिन मह्यव अधिकारी है।

कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र सिंह तोमर,विशेष न्यायाधीश / तृतीय जिला न्यायाधीश राम सहारे राज, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जिला न्यायाधीश संगीता पटेल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आर पी अहिरवार, द्वितीय व्यहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड धर्मेंद्र खंडायत, खालिदा तनवीर प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड,अमृता मिश्रा तृतीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड, जिला जेल अधीक्षक डी के सारस ,जेलर एम एस मार्को सहित गायत्री परिवार एवं हार्टफुलनेस संस्था के सदस्य सहित सहायक ग्रेड 3 फिरोज मंसूरी मौजूद रहे।

आर्टिकल/संजय विश्वकर्मा

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