Ujjain News :. महाकाल की नगरी उज्जैन में परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। उमा सांझी महोत्सव के अवसर पर माता उमा की भव्य सवारी निकाली गई।
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में सोमवार को परंपरा, आस्था और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। अश्विन शुक्ल द्वितीया पर उमा सांझी महोत्सव के अंतर्गत माता उमा की भव्य सवारी नगर भ्रमण के लिए निकाली गई । इसमें देश प्रदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इसकी भव्य शुरुआत महाकाल मंदिर से हुई और नगर भ्रमण के बाद क्षिप्रा तट पर सवारी का समापन किया गया। सोमवार शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विशेष पूजन-अर्चन हुआ। इसके बाद विधिवत रूप से माता उमा की सवारी प्रारंभ हुई। जिस तरह सावन में भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं, उसी परंपरा के अनुसार माता उमा की सवारी भी निकाली जाती है।
मन्दिर ले मुख्य द्वार पर पुलिस बल की टुकड़ियों ने माता की पालकी को गॉड ऑफ ऑनर दिया । सैकड़ों श्रद्धालु नगर भ्रमण में शामिल हुए और माता उमा के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा । पालकी और झांकियों के दर्शन के लिए हर चौराहे पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही । महाकाल मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह परंपरा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रमाण है। यह भव्य शोभायात्रा महाकाल चौराहा से होकर घाटी, तोपखाना, दौलतगंज, नई सड़क, कंठाल, सराफा और छत्रीचौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची । इसके बाद यात्रा पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कार्तिक चौक से आगे बढ़ी. अंतिम पड़ाव मां क्षिप्रा का तट रहा, जहां रामघाट पर परंपरा अनुसार जवारे और संजा विसर्जन किया गया । उज्जैन का उमा सांझी महोत्सव परंपरा, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम है । महाकाल नगरी में हर वर्ष आयोजित होने वाली यह सवारी धार्मिक महत्व और सामाजिक एकजुटता का संदेश देती है। इस बार भी शहर श्रद्धालुओं के जोश और भक्ति से सराबोर रहा।
इस शोभायात्रा में रजत विग्रह की पालकी मुख्य आकर्षण रही। डोल रथ पर गरुड़ पर विराजमान माता की प्रतिमा और भगवान श्री महेश की झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया । भजन मंडलियां शोभायात्रा में शामिल रहीं, वहीं घोड़े पर सवार पुलिस बल आगे-आगे चलता नजर आया । रामघाट पर पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ जवारे और संजा का विसर्जन हुआ । इसके बाद शोभायात्रा पुनः महाकाल रोड और बक्षी बाजार से होती हुई महाकालेश्वर मंदिर लौटी । यहां परंपरा के साथ सवारी का समापन किया गया।

