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SDM के कार्यालय,वाहन,कंप्यूटर और लैपटॉप की कुर्की करने कोर्ट ने दिए आदेश जानिए क्या है पूरा मामला

किसान को कुंडालिया बांध परियोजना डूब में जमीन का मुवावजा नही देने पर न्यायालय ने एसडीएम राजस्व सुसनेर के कार्यालय, वाहन, कम्प्यूटर, लेपटॉप आदि के कुर्की के दिये आदेश।

आगर मालवा- अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुसनेर एवं कार्यपालन यंत्री कुंडालिया बांध पर 2,09,19020/- रु की वसूली के लिए अपर जिला न्यायाधीश सुसनेर के आदेश के बाद पीड़ित किसानों ने कुर्की हेतु तलवाना अपर जिला कोर्ट सुसनेर में प्रस्तुत कर दिया है। जिसमे एसडीएम सुसनेर के कार्यालय, वाहन, कम्प्यूटर, लेपटॉप एवं फर्नीचर आदि एवं इसी प्रकार कार्यपालन यंत्री कुंडालिया परियोजना सम्भाग  जीरापुर सम्पूर्ण कार्यालय एवं कार्यालय में उपलब्ध समान की कुर्की के आदेश के लिए तलवाना भी फरियादी किसान की ओर से न्यायालय के आदेश के पालन में 19 अप्रेल को जमा कर दिया गया। जिससे अब कभी भी न्यायालय के आदेश पर एसडीएम सुसनेर एवं कार्यपालन यंत्री कुंडालिया बांध परियोजना के जीरापुर सम्भाग स्थित सम्पूर्ण कार्यालय, वाहन, कम्प्यूटर, लेपटॉप, फर्नीचर एवं अन्य सामग्री के कभी भी कुर्क होने की तलवार लटक गई है।

दरअसल यह सारी कार्रवाही सुसनेर अपर सत्र न्यायालय और हाइकोर्ट इंदौर बेंच के स्पष्ट फैसले के बाद भी बेवजह अभी तक कुंडालिया बांध क्षेत्र में डूब में आए 2 किसानो के फलदार वृक्षो का अभी तक मुआवजा राशि ना देने पर सामने आ रही है जिसमे समय पर राशि के भुगतान ना करने से भारी भरकम ब्याज की राशि भी शामिल है।

SDM के कार्यालय,वाहन,कंप्यूटर और लैपटॉप की कुर्की करने कोर्ट ने दिए आदेश जानिए क्या है पूरा मामला
Source : Social Media

 

यह है पूरा मामला-

कुंडालिया बांध हेतु भू अधिग्रहण के तहत 2 किसानो रामकुंवर पत्नी बनैसिंह और गिरिराज पिता बनैसिंह निवासी ग्राम गोठड़ा तह नलखेड़ा को सुसनेर राजस्व विभाग द्वारा डूब में आई भूमि पर लगे फलदार वृक्षो का मुआवजा आंकलन 17/10/2017 के दिशा निर्देशों के अनुसार किसानों को क्रमशः 21.30,000/- रु. एवं 20,44,000/- रु किया गया था जिससे व्यथित होकर पीड़ित किसानों  ने इस आदेश के खिलाफ एक सिविल सूट अपर जिला न्यायधीश सुसनेर की कोर्ट में अधिवक्ता देवेंद्रसिंह चौहान के मार्फत लगाते हुए फलदार वृक्षो का मुआवजा शासन की गाईड लाईन दिनांक 2/4/2017 से देने का निवेदन माननीय न्यायालय से किया था ।

व्यथित किसानो ने अपने दावे में बताया था कि मुआवजे के सम्बंध में जो कार्रवाही की गई है वह 2/4/2017 के पूर्व की गई है इसलिए उन्हें यह मुआवजा 2/4/2017 की गाईड लाइन के अनुसार दिया जाना चहिए ना कि 17/10/2017 की गाईड लाईन के अनुसार।

अपर जिला न्यायाधीश ने पीड़ित किसानो के अधिवक्ता देवेंद्रसिंह चौहान के तर्कों से सहमत होते हुए दिनांक 14/9/2021 को एक आदेश पारित कर अनुविभागीय अधिकारी सुसनेर और कार्यपालन यंत्री कुंडालिया बांध को पीड़ित किसानो को 02/4/2017 की गाईड लाईन के हिसाब से उद्यान विभाग द्वारा गठित दल द्वारा की गई गणना के अनुसार क्रमशः 88, 31,000/- एवं 43,98,000/- रु देने एवं साथ ही पीड़ित किसानो की शेष बची राशि पर भूमि अधिग्रहण दिनांक से 1 वर्ष तक 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष का ब्याज और उसके बाद 15 प्रतिशत प्रतिवर्ष का ब्याज देने हेतु आदेशित किया था।

इस आदेश से असंतुष्ट होकर सुसनेर अनुविभागीय अधिकारी और कार्यपालन यंत्री कुंडालिया बांध द्वारा इंदौर की हाइकोर्ट बेंच में अपील की गई जिस पर इंदौर हाइकोर्ट ने भी दिनांक 6 फरवरी 2023 को किसानो के पक्ष में फैसला देते हुए अनुविभागीय अधिकारी आदि की इस अपील को खारिज कर दिया ।

हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस आदेश के बाद भी किसानो को अभी तक भुगतान ना मिलने से पीड़ित किसानों ने अपर जिला नयाधिश सुसनेर को अवगत कराते हुए इस राशि की मांग की थी जिसके बाद दिनांक 17/4/2023 को अपर जिला न्यायाधीश सुसनेर ने पीड़ित पक्ष को अनुविभागिय अधिकारी सुसनेर आदि पर कुर्की वारंट जारी करने हेतु तलवाना प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया था, जिस पर पीड़ित पक्ष द्वारा दिनांक 19/4/2023 को पीड़ित किसान रामकुवरबाई द्वारा उन्हें वसूली योग्य पाई गई राशि पर ब्याज के साथ कुल 1,54,99332/- रु एवं पीड़ित किसान बनैसिंह द्वारा कुल राशि 54,19,688/- रु की वसूली हेतु तलवाना प्रस्तुत कर दिया गया है जिसके बाद अब अपर जिला न्यायालय द्वारा कभी भी अनुविभागिय अधिकारी सुसनेर आदि पर कुर्की वारंट जारी किया जा सकता है ।

अब पूरे प्रकरण में सबसे विचारणीय तथ्य यह है कि हाइकोर्ट के स्पस्ट आदेश के बाद भी पीड़ित किसानो को भुगतान में हुई बेवजह की देरी के लिए जो भारी भरकम ब्याज शासन को देना होगा क्या उसके लिए भी किसी को जिम्मेदार बनाया जाएगा या फिर यह चलता है की तर्ज पर यह भी चल जाएगा। अनुविभागीय अधिकारी सुसनेर किरण वरबड़े का कहना है कि उक्त मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे, सुप्रीम कोर्ट से जो भी आदेश होगा उसका पालन शासन करेगा।

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